Shri Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi - Gulshan Kumar

 Shri Hanuman Chalisa


श्रीगुरु चरन सरोज रज,निजमनु मुकुरु सुधारि|

बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि|


बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार||

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार||


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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर|| 

राम दूत अतुलित बल धामा

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा||

महाबीर बिक्रम बजरंगी

कुमति निवार सुमति के संगी||

कंचन बरन बिराज सुबेसा

कानन कुण्डल कुँचित केसा||

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे

काँधे मूँज जनेउ साजे

शंकर सुवन केसरी नंदन

तेज प्रताप महा जग वंदन||

बिद्यावान गुनी अति चातुर

राम काज करिबे को आतुर||

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया

राम लखन सीता मन बसिया||

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा

बिकट रूप धरि लंक जरावा||

भीम रूप धरि असुर सँहारे

रामचन्द्र के काज सँवारे||

लाय सजीवन लखन जियाये

श्री रघुबीर हरषि उर लाये||

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई||

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं||

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा

नारद सारद सहित अहीसा||

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते||

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा

राम मिलाय राज पद दीन्हा||

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना

लंकेश्वर भए सब जग जाना||

जुग सहस्र जोजन पर भानु 

लील्यो ताहि मधुर फल जानू||

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं||

दुर्गम काज जगत के जेते

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते||

राम दुआरे तुम रखवारे

होत न आज्ञा बिनु पैसारे||

सब सुख लहै तुम्हारी सरना

तुम रच्छक काहू को डर ना||

आपन तेज सम्हारो आपै

तीनों लोक हाँक तें काँपै||

भूत पिसाच निकट नहिं आवै

महाबीर जब नाम सुनावै||

नासै रोग हरे सब पीरा

जपत निरन्तर हनुमत बीरा||

संकट तें हनुमान छुड़ावै

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै||

सब पर राम तपस्वी राजा

तिन के काज सकल तुम साजा||

और मनोरथ जो कोई लावै

सोई अमित जीवन फल पावै||

चारों जुग परताप तुम्हारा

है परसिद्ध जगत उजियारा||

साधु सन्त के तुम रखवारे

असुर निकन्दन राम दुलारे||

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता

अस बर दीन जानकी माता||

राम रसायन तुम्हरे पासा 

सदा रहो रघुपति के दासा||

तुह्मरे भजन राम को पावै

जनम जनम के दुख बिसरावै||

अन्त काल रघुबर पुर जाई

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई||

और देवता चित्त न धरई

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई||

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा||

जय जय जय हनुमान गोसाईं

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं||

जो सत बार पाठ कर कोई

छूटहि बन्दि महा सुख होई||

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा

होय सिद्धि साखी गौरीसा||

तुलसीदास सदा हरि चेरा

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा||

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पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप||

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप||

सिया वर राम चन्द्र की जय||

पवनसुत हनुमान की जय||

उमा पति महादेव की जय||




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